उन्वान
एक मुसाफिर मिला था सफर में
किसी मुंतजिर सा लग रहा था
आंखों में अलगसी एहतिमाल थी
और चेहरे पर ज़ुल्मत
लगता तो वो मुम्ताज़ था
लेकिन शायद ताराज के रास्ते पे था
अफ़कार थी या रंज
या सिर्फ एक उज़्र
क्या मफ़हूम था उसकी बातों का
जो उसकी खराब बख्त का जवाज़ दे रही थी
काविश थी उसकी अबद रहने की
या फिर अपने हिदायत के क़तरोंसे तिश्नगी बुझाने की
तजस्सूस से देखा उसकी बे-ज़ार आँखों को
एहसास दिखाया उसने उसकी ख़ुलूस का
नक्श छोड़ के गया मेरे दिल पे
वो था उन्वान किसी किताब का
- गौरी अजय चिंदरकर
19/05/2019
For reference-
मुंतजिर- प्रतीक्षित, एहतिमाल- अनिश्चितता, ज़ुल्मत- अंधकार, ताराज- बरबादी, अफ़कार- चिंता, रंज- दुःख, उज़्र- बहाना, मफ़हूम- अर्थ, बख्त- भाग्य , जवाज़- औचित्य (justification), काविश- प्रयास, अबद-अनन्तकाल, हिदायत- मार्गदर्शन, क़तरा- बून्द, तिश्नगी- प्यास, तजस्सूस- जिज्ञासा, बे-ज़ार- उदासिन, ख़ुलूस- निर्मलता, नक्श- छाप, उन्वान- शीर्षक
किसी मुंतजिर सा लग रहा था
आंखों में अलगसी एहतिमाल थी
और चेहरे पर ज़ुल्मत
लगता तो वो मुम्ताज़ था
लेकिन शायद ताराज के रास्ते पे था
अफ़कार थी या रंज
या सिर्फ एक उज़्र
क्या मफ़हूम था उसकी बातों का
जो उसकी खराब बख्त का जवाज़ दे रही थी
काविश थी उसकी अबद रहने की
या फिर अपने हिदायत के क़तरोंसे तिश्नगी बुझाने की
तजस्सूस से देखा उसकी बे-ज़ार आँखों को
एहसास दिखाया उसने उसकी ख़ुलूस का
नक्श छोड़ के गया मेरे दिल पे
वो था उन्वान किसी किताब का
- गौरी अजय चिंदरकर
19/05/2019
For reference-
मुंतजिर- प्रतीक्षित, एहतिमाल- अनिश्चितता, ज़ुल्मत- अंधकार, ताराज- बरबादी, अफ़कार- चिंता, रंज- दुःख, उज़्र- बहाना, मफ़हूम- अर्थ, बख्त- भाग्य , जवाज़- औचित्य (justification), काविश- प्रयास, अबद-अनन्तकाल, हिदायत- मार्गदर्शन, क़तरा- बून्द, तिश्नगी- प्यास, तजस्सूस- जिज्ञासा, बे-ज़ार- उदासिन, ख़ुलूस- निर्मलता, नक्श- छाप, उन्वान- शीर्षक
Awesome one
ReplyDeleteजबरदस्त nice use of urdu language
ReplyDeleteSuperb����
ReplyDeleteKhup chan
ReplyDeleteKhup chan dear gouri👌
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