मुस्कान

सोचा कुछ यूहीं दुनिया की सैर कर लेते हैं
देखा तो ज़िंदगी ने दुनिया दिखाई है

कुछ मतलबी अंदाज हमेशा नजर आए हैं
कुछ पुराने लम्हे बिन बुलाए सामने आए है

अल्फाज से बने वादे अचानक से डगमगाने जो लगे है 
दिल के अरमान कुछ अंधुक से दिख रहे हैं

कसमोंसे जुड़े रिश्ते फिर भी आपस में गुनगुना रहे हैं
मुझे ही मेरे ख्वाबिदा होने का एहसास दिला रहे है

सामने खडे मंझिलने गिरते हुए भी चलने को मजबूर किया है
फिरसे उसी उम्मीद से दौड़ लगाने को कहा हैं

बहुत मुश्किलों से ये दर्या राह दिखा रहा है
शायद आज मेरी मेहनत रंग लायी हैं

जिंदगी ने चलते चलते दुनिया दिखाई हैं
जाते जाते इसी सफर ने बस्स एक मुस्कान छोड़ने कही हैं

- गौरी अजय चिंदरकर
२१/०५/२०१८

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